घोंसा खदान की कैंटीन के संचालन पर सवाल; कर्मचारियों ने विजिलेंस जांच की मांग उठाई
वणी : वणी नॉर्थ एरिया की घोंसा कोयला खदान में संचालित कैंटीन की व्यवस्था और कार्यप्रणाली को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कैंटीन के रखरखाव, कर्मचारियों की ड्यूटी और बिक्री-खर्च के हिसाब में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कुछ कर्मचारियों ने मामले की विजिलेंस जांच कराने की मांग की है।
घोंसा खदान में कंपनी द्वारा कर्मचारियों के साथ-साथ खदान परिसर में आने वाले निजी कामगारों, कोयला परिवहन से जुड़े कर्मचारियों और वाहन चालकों की सुविधा के लिए कैंटीन शुरू की गई है। इसके लिए कंपनी ने लाखों रुपये खर्च कर टेबल, कुर्सियों सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। हालांकि, वर्तमान में कैंटीन की हालत खराब होने तथा नियमित मेंटेनेंस नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है।
कर्मचारियों का आरोप है कि कैंटीन में एक ओएस (OS) कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है। बताया जाता है कि संबंधित कर्मचारी एक श्रमिक संगठन का पदाधिकारी भी है और लंबे समय से कैंटीन का काम देख रहा है। उसके साथ एक जनरल मजदूर की ड्यूटी लगाई गई है। आरोप है कि कैंटीन सुबह करीब आठ बजे शुरू होने के बाद संबंधित कर्मचारी कुछ समय काम करने के पश्चात वहां से चला जाता है और इसके बाद कैंटीन का कामकाज प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो पाता।
कैंटीन में प्रतिदिन होने वाली चाय और अन्य वस्तुओं की बिक्री का उचित हिसाब रखा जाता है या नहीं, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी की ओर से कैंटीन के लिए चायपत्ती, शक्कर, पीने का पानी सहित अन्य सामग्री पर खर्च किया जाता है, लेकिन इन खर्चों के बिल और वास्तविक उपयोग की जांच आवश्यक है। फर्जी अथवा अनियमित बिलों के माध्यम से खर्च दर्शाए जाने का आरोप सूत्रों द्वारा लगाया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इसके अलावा कैंटीन में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने और लंबे समय से मेंटेनेंस नहीं किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई कैंटीन की वर्तमान स्थिति को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बताई जा रही है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि कैंटीन में तैनात कर्मचारियों की उपस्थिति, ड्यूटी रजिस्टर, वास्तविक कार्य समय, चाय एवं अन्य सामग्री की खरीदी, बिक्री का हिसाब तथा बिलों की जांच की जाए। साथ ही पूरे मामले की विजिलेंस विभाग से निष्पक्ष जांच कराकर यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधितों पर कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि घोंसा खदान प्रबंधन और महाप्रबंधक इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कैंटीन की व्यवस्था में सुधार के साथ कथित अनियमितताओं की जांच के लिए क्या कदम उठाते हैं?



















