वणी रेल साइडिंग में ‘कोयला अल्टी-पलटी’ का कथित खेल फिर शुरू?
फरवरी के मामले में अब तक मुख्य आरोपी गिरफ्त से बाहर; रात के अंधेरे में अच्छे कोयले की जगह मिट्टी-गिट्टी भेजे जाने के आरोप से मचा हड़कंप
वणी | प्रतिनिधि
वणी नॉर्थ एरिया की रेल साइडिंग से महाजेनको को भेजे जाने वाले कोयले को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फरवरी 2026 में कोयले की जगह गिट्टी भेजे जाने का मामला सामने आने, पुलिस में शिकायत और एफआईआर दर्ज होने तथा संबंधित कंपनी पर कार्रवाई के बावजूद अब तक जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंचने का आरोप है। इसी बीच अब वणी रेल साइडिंग में कथित रूप से फिर से ‘कोयला अल्टी-पलटी’ का खेल शुरू होने की चर्चा है।
आरोप है कि रात के अंधेरे में अच्छी गुणवत्ता का कोयला लालपुलिया परिसर में उतारकर उसके स्थान पर खराब मिट्टी अथवा गिट्टी ट्रकों में भरकर वणी रेल साइडिंग पहुंचाई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
23 फरवरी की घटना ने खोला था मामला
जानकारी के अनुसार, 23 फरवरी 2026 की रात उकणी कोयला खदान से महाजेनको के लिए भेजे जाने वाले कोयले के कुछ ट्रक वणी रेल साइडिंग पहुंचे थे। जांच के दौरान कुछ ट्रकों में कोयले के बजाय गिट्टी अथवा संदिग्ध सामग्री पाए जाने की जानकारी सामने आई।
मामला सामने आने के बाद संबंधित ट्रकों को पुलिस के हवाले किया गया। बताया जाता है कि इस दौरान ट्रक चालक मौके से फरार हो गए।
इसके बाद 25 फरवरी को WCL के वरिष्ठ प्रबंधक देवेंद्र प्रतापसिंह परिहार ने वणी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर BNS की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
दो महीने बाद फिर पकड़ा गया ट्रक?
फरवरी की घटना के बाद कुछ समय तक कथित रूप से यह गतिविधि बंद रही। लेकिन 23 अप्रैल 2026 को फिर एक ट्रक में कोयले के साथ खराब मिट्टी और गिट्टी जैसी सामग्री पाए जाने का दावा किया जा रहा है। इस मामले में भी वणी पुलिस स्टेशन में शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके बाद संबंधित कृष्णा इंटरप्राइजेस कंपनी को एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई WCL स्तर पर किए जाने की बात सामने आई।
लेकिन सवाल यह है कि यदि कार्रवाई की गई थी, तो इसके बावजूद अब कथित रूप से वही गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हो गईं?
अच्छे कोयले की जगह खराब माल भेजने का आरोप
अब सामने आ रहे आरोपों के अनुसार, वणी नॉर्थ एरिया की रेल साइडिंग में रात के समय ट्रकों के माध्यम से कोयले की कथित अदला-बदली की जा रही है।
आरोप है कि ट्रक को पहले लालपुलिया परिसर में एक स्थान पर तौला जाता है। इसके बाद अच्छे कोयले को अलग स्थान पर उतारकर ट्रक में खराब मिट्टी अथवा गिट्टी भरने और फिर उसे रेल साइडिंग की ओर भेजने का कथित खेल चल रहा है।
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल परिवहन में अनियमितता का मामला नहीं बल्कि कोयले की गुणवत्ता, वजन और राजस्व से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
वजनकांटा और सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के घेरे में?
इस पूरे मामले में रेल साइडिंग के वजनकांटे, सुरक्षा व्यवस्था, संबंधित कर्मचारियों तथा परिवहन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की मांग उठ रही है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही हो रही है, तो वाहनों की एंट्री, वजन, GPS रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और साइडिंग में माल की जांच क्यों नहीं की जा रही?
फरवरी की घटना के बाद कुछ कर्मचारियों के निलंबन और कुछ के तबादले की जानकारी भी सामने आई थी। लेकिन इन कर्मचारियों से पुलिस ने कितनी विस्तृत पूछताछ की और उनके बयानों के आधार पर जांच कहां तक पहुंची, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
उकणी, कोलार-पिंपरी और GPS विभाग की भूमिका पर भी सवाल
पूरे मामले में उकणी सब एरिया, कोलार-पिंपरी सब एरिया और GPS से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
कौन-सा ट्रक खदान से निकला?
उसमें कितना कोयला था?
GPS में उसकी वास्तविक लोकेशन क्या थी?
ट्रक रास्ते में कितनी देर रुका?
वजनकांटे पर उसका वजन कितना हुआ?
रेल साइडिंग में पहुंचने के बाद उसमें क्या सामग्री मिली?
इन सवालों के जवाब GPS डेटा, CCTV फुटेज, वजन पर्चियों और वाहनों की आवाजाही के रिकॉर्ड से आसानी से सामने आ सकते हैं।
‘सेटिंग’ के आरोपों की हो निष्पक्ष जांच
इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर संबंधित विभागों के कुछ कर्मचारियों के साथ कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि किसी अधिकारी, कर्मचारी या सुरक्षा गार्ड पर मिलीभगत का आरोप बिना ठोस प्रमाण के निश्चित तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता।
इसीलिए मांग उठ रही है कि पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करें तथा फरवरी और अप्रैल में सामने आए मामलों को भी वर्तमान आरोपों से जोड़कर जांचें।
करोड़ों के नुकसान का दावा, लेकिन जवाबदेही किसकी?
महाजेनको को भेजे जाने वाले कोयले में यदि वास्तव में गुणवत्ता या मात्रा की हेराफेरी हुई है, तो इससे सरकारी संस्थाओं को आर्थिक नुकसान होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
लेकिन बड़ा सवाल यही है—
फरवरी में मामला सामने आया, एफआईआर दर्ज हुई, कार्रवाई हुई, कंपनी ब्लैकलिस्ट हुई और फिर भी अब कथित तौर पर वही खेल दोबारा शुरू होने की चर्चा क्यों है?
मुख्य आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?
ट्रकों की आवाजाही और वजनकांटे के रिकॉर्ड की जांच क्यों नहीं सार्वजनिक की गई?
CCTV और GPS रिकॉर्ड से पूरे मामले की कड़ियां क्यों नहीं जोड़ी जा रही हैं?
और सबसे अहम—
अगर ‘कोयला अल्टी-पलटी’ का खेल सचमुच चल रहा है, तो इसके पीछे आखिर कौन है?
इन सवालों का जवाब अब पुलिस जांच और संबंधित विभाग की कार्रवाई से ही सामने आएगा। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की गहराई से जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।



















