वणी रेल साइडिंग कोयला हेराफेरी प्रकरण: चार महीने बाद भी जांच अधूरी, कई पहलुओं पर अब भी सस्पेंस

वणी रेल साइडिंग कोयला हेराफेरी प्रकरण: चार महीने बाद भी जांच अधूरी, कई पहलुओं पर अब भी सस्पेंस

वणी | आबीद हुसेन

वणी रेल साइडिंग पर सामने आए करोड़ों रुपये के कथित कोयला हेराफेरी प्रकरण को लगभग चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं होने से पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि अब तक न तो किसी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हुई है और न ही उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों से व्यापक पूछताछ की गई है, जिनके नाम इस प्रकरण में चर्चा में रहे हैं।

गौरतलब है कि 23 फरवरी की रात उकणी कोयला खदान से वणी रेल साइडिंग पहुंचा कोयला महाजनको के लिए रवाना किया जाना था। जांच के दौरान कुछ ट्रकों में कोयले के स्थान पर गिट्टी पाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद 25 फरवरी को वेकोली के वरिष्ठ प्रबंधक देवेंद्र प्रतापसिंह परिहार ने वणी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

चार महीने बीत जाने के बावजूद जांच की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, वेकोली के जिन कर्मचारियों को इस प्रकरण के बाद निलंबित किया गया, उनसे भी अब तक पुलिस द्वारा पूछताछ नहीं किए जाने की चर्चा है। इसी प्रकार उकणी सब एरिया, कोलार-पीपरी सब एरिया तथा जीपीएस विभाग के संबंधित अधिकारियों से भी विस्तृत पूछताछ नहीं होने की बात सामने आ रही है।

इस प्रकरण में लालपुलिया क्षेत्र स्थित एक कांटा (वजन पुल) भी लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर ऐसी चर्चा है कि इसी कांटा परिसर में कथित रूप से अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले और निम्न गुणवत्ता वाले कोयले का वजन किया जाता था। साथ ही कांटा परिसर के पीछे स्थित एक खाली प्लॉट पर ट्रकों से अच्छा कोयला उतारकर उसकी जगह मिट्टी और बारीक गिट्टी भरकर ट्रकों को वणी रेल साइडिंग की ओर भेजे जाने की बातें भी चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि संबंधित कांटा संचालक और प्लॉट किसके स्वामित्व में है, इसकी जानकारी क्षेत्र में किसी से छिपी नहीं है। इसके बावजूद अब तक इस पहलू की जांच सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने से कई तरह की शंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। हालांकि, इन सभी दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच का विषय है।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में वणी रेलवे साइडिंग के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही, जिसके चलते कुछ कर्मचारियों का तबादला तथा कुछ को निलंबित किया गया। हाल ही में ड्रग्स प्रकरण में गिरफ्तार हुए रेलवे साइडिंग के कर्मचारी अविनाश पाटिल का नाम भी चर्चाओं में है। बताया जा रहा है कि उनका तबादला कोलार-पीपरी क्षेत्र में किया गया था। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने लंबे समय तक नई जगह कार्यभार ग्रहण नहीं किया था और ड्रग्स प्रकरण में गिरफ्तारी से दो दिन पहले ही मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र देकर जॉइनिंग की थी। हालांकि, इस संबंध में पुलिस या वेकोली की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं गहन जांच की जाए तो विभागीय अधिकारियों, संबंधित कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों, कांटा संचालन से जुड़े लोगों तथा अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। कुछ लोगों द्वारा जनप्रतिनिधियों की संभावित भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

नागरिकों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, व्यापक और तकनीकी जांच करनी चाहिए। यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, ट्रांसपोर्टर, कांटा संचालक या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, करोड़ों रुपये के इस कथित कोयला हेराफेरी प्रकरण में जांच की धीमी रफ्तार, अब तक गिरफ्तारी नहीं होना तथा कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने से नागरिकों में असंतोष दिखाई दे रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और पूरे मामले की सच्चाई कब सामने आती है।

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